फिल्म रिव्यू -" जजमेंटल है क्या " (Judgementall Hai Kya) फिल्म

फिल्म रिव्यू -" जजमेंटल है क्या " (Judgementall Hai Kya) फिल्म

फिल्म रिव्यू -" जजमेंटल है क्या " (Judgementall Hai Kya) फिल्म 

न्यू दिल्ली | इंडिया बेस्ट न्यूज़ |  पुरुषोत्तम  दुबे

स सप्ताह दो फिल्मे रिलीज़ हुई जिसमे पहली 'जजमेंटल है क्या' और दूसरी 'अर्जुन पटियाला'। जहाँ तक अर्जुन पटियाला की बात है फिल्म में दिलजीत दोसांझ और कृति सेनन की जोड़ी है और साथ में है वरुण शर्मा। फिल्म की कहानी पंजाब की है जहाँ दिलजीत एक पुलिस वाला है और वो अपने पंजाब को क्राइम फ्री करना चाहता है इसमें उसका साथ देती है टीवी रिपोर्टर कृति। फिल्म में दिलजीत की एक्टिंग कॉमेडी लिए हुए है और पुलिस इंस्पेक्टर के किरदार में वो खूब जमे है, दिलजीत की अपनी अलग फैन फॉलोविंग है जो इन्हे दिलोंजान से चाहती है इसलिए इस फिल्म को देखने वाले दर्शक सीमित ही है। वही अपने प्रोमो से ही दर्शकों को आकर्षित करने वाली फिल्म जजमेंटल है क्या भी रिलीज़ हुई जिसमे कंगना और राजकुमार राव है। कंगना रनौत एक ऐसा नाम है जो सुर्खियों में रहता है चाहें एक्टिंग हो या अफेयर या कोई कंट्रोवर्सी उनके हमेशा साथ जुड़ी होती है पर इस सबका असर उनकी अदाकारी में नही पड़ता जितनी वो उलझनों से उलझती है उतनी ही उनकी एक्टिंग मैं निखार आता जा रहा है इसको यह भी कह सकते है सोना आग में तपकर ही कुंदन बनता है कंगना के लिए यह बात इसलिए कही जा रही है इस सप्ताह उनकी फिल्म 'जजमेंटल है क्या' रिलीज़ हुई है जिसमे उनके साथ आजकल के सबसे जबरदस्त एक्टर राजकुमार राव जिन्होंने अपनी अदाकारी से सबका मन जीता हुआ है अब ये देखना होगा कि किसकी अदाकारी ज्यादा अच्छी है।

 

 

कलाकार - राजकुमार राव, कंगना रनौत, अमायरा दस्तूर, सतीश कौशिक और मेहमान कलाकर जिमी शेरगिल 
कहानी - जहाँ तक फिल्म की कहानी की बात है, जिनके माता पिता बचपन में ही इस दुनियाँ से चले जाते है या झगड़ो में ही अपनी ज़िन्दगी जीते है उनके बच्चों में कोई न कोई परेशानी अक्सर देखी जाती है इस फिल्म में भी कुछ ऐसा ही है। बॉबी यानि कंगना रनौत जो बचपन में ही अपने माता खो देती है और इसी के साथ मानसिक रोग एक्यूट सायकोसिस का शिकार हो जाती है इस बीमारी के कारण उसके अंदर झूठ और सच, सही और गलत, अत्यधिक गुस्सा या अत्यधिक प्यार, इमेजिनेशन पॉवर, इल्यूजन और मूड स्विंग का असर होता रहता है, जबकि वो साउथ की फिल्मो की डबिंग आर्टिस्ट है इसीलिए वो कभी हॉरर, कभी रोमांटिक या अन्य किरदारों में अपने आपको ढाल लेती है, एक दिन तो गुस्से में उसने इतनी मार पीट करी की उसे कुछ समय के लिए मेन्टल असाइलम में भर्ती होना पड़ता है जहाँ उन्हें साथ साथ दवाइयां भी दी जाती है इसी बीच उसके घर एक किरायेदार आता है केशव यानि राजकुमार राव अपनी पत्नी रीमा यानि अमायरा दस्तूर के साथ। बॉबी को उसकी हरकते पसंद आती है और वो उसकी और आकर्षित होने लगती है, साथ ही साथ उसकी मानसिक बीमारी उसपर असर करने लगती है और वो केशव पर शक करने लगती है यहाँ तक उसकी जासूसी भी। इसी बीच एक कत्ल हो जाता है, पुलिस को केशव और बॉबी दोनों पर शक है, लेकिन कत्ल की गुत्थी उलझती चली जाती है।

निर्देशन - निदेशक प्रकाश कोवलामुदी ने इस फिल्म को थ्रिलर, सस्पेंस और हॉरर का पुट देते हुए तैयार किया है और शायद वो जानते थे की इस किरदार को कंगना से बेहतर और कोई नहीं निभा सकता। फिल्म का फर्स्ट हॉफ तो ज़बरदस्त है लेकिन सेकंड हाफ में कुछ कमी नज़र आती है लेकिन मेन्टल इलनेस की बीमारी को पर्दे पर बखूबी उतारा है और निर्देशक ने फिल्म को अपने ट्रैक से बिल्कुल उतरने नहीं दिया। यह कहना गलत नहीं होगा की उन्होंने कनिका ढिल्ल्न की स्क्रिप्ट को बहुत ख़ूबसूरती से पेश किया है।

गीत संगीत - फिल्म में म्यूजिक अलग अलग संगीतकारों का है, और वखरा स्वैग टॉप लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है।

 

 

एक्टिंग - एक्टिंग के मामले मे कंगना ओर राजकुमार दोनों ही बेहतर काम किया है फिल्म को देखकर लगता है कंगना अपनी झोली में तीसरा नेशनल अवार्ड लेने के लिए तैयार है। कंगना ने इस फिल्म में अपनी जुनूनी अदाकारी दिखाने की पूरी कोशिश की है जिसमे वो सफल भी रही है, डर, गुस्सा और पागलपन उनके चेहरे पर बखूबी नज़र आता है जो फिल्म की यूएसपी है। कंगना खूबसूरत और हॉट दोनों लगी है उस उनका जज को पैसे न देकर पागल खाने में रहने का फैसला करते वक़्त उसके चेहरे के एक्स्प्रेशन जबरदस्त लगते है। जहाँ तक राजकुमार राव की अदाकारी की बात है उन्होंने इस फिल्म में भी अपनी एक्टिंग से लोहा मनवा लिया है। अभी तक उन्होंने जितनी भी फिल्में की हो चाहे वो ट्रैप्ड हो, न्यूटन हो, स्त्री हो या फिर बरेली की बर्फी सभी में उन्होंने अपनी एक अलग छाप छोड़ी है, उनकी एक्टिंग के साथ साथ उनकी कॉमेडी की टाइमिंग भी बढ़िया है। छोटे से रोल में जिम्मी शेरगिल अपनी छाप छोड़ते है वही अमायरा दस्तूर के पास करने के लिए कुछ ज्यादा था नहीं।

फिल्म की खास बात - अगर आप कंगना और राजकुमार राव की जबरदस्त एक्टिंग देखना चाहते है और उनके फैन है तो ज़रूर जाकर देखे यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
फिल्म समीक्षक : पुरुषोत्तम दुबे