प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में झारखंड के आरा और केरम गांव की तारीफ किया है जानिए कैसा है ये गांव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में झारखंड के आरा और केरम गांव की तारीफ किया है जानिए कैसा है ये गांव
न्यू दिल्ली | इंडिया बेस्ट न्यूज़ | पुरुषोत्तम दुबे
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आज अपने "मन की बात" एक कार्यक्रम के तहत लाखों करोड़ों भारतीयों को झारखंड के आरा और कैरम गांव की तारीफ की और बोले रांची से कुछ दूर, ओरमांझी प्रखंड के आरा-केरम गांव में, ग्रामीणों ने जल प्रबंधन को लेकर जो हौसला दिखाया है, वो हर किसी के लिए मिसाल बन गया है. 
ग्रामीणों ने अपना श्रमदान करके पहाड़ से बहते झरने को, एक निश्चित दिशा देने का काम किया. वो भी शुद्ध देसी तरीके से. इससे न केवल मिट्टी का कटाव और फसल की बर्बादी रुकी है, बल्कि खेतों को भी पानी मिल रहा है. ग्रामीणों का ये श्रमदान, अब पूरे गांव के लिए जीवनदान से कम नहीं है.’
 
दोनों गांवों के नाम हैं आरा और केरम. राजधानी रांची से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित ओरमांझी प्रखंड में हैं ये दोनों गांव. दोनों के बीच की दूरी सिर्फ दो किलोमीटर है. पहाड़ की तलहटी में बने मार्ग का आखिरी गांव है केरम. लेकिन, कई मामलों में यह राज्य का सबसे श्रेष्ठ गांव है. जी हां, इन गांवों की स्वच्छता और सौंदर्य देखते ही बनता है. शहरी क्षेत्र के वार्डों को भी मात देते हैं दोनों गांव. जल संरक्षण के दम पर इस गांव ने गरीबी को मात दी है.
कुछ साल पहले तक ये गांव नशेड़ियों के गांव के रूप में जाना जाता था. लेकिन, स्थानीय प्रशासन और गांव की महिलाओं की समझ-बूझ और जागरूकता ने इन गांवों की दशा और दिशा को सुधार दिया. यही वजह है कि पिछड़े राज्य के एक छोटे से कोने में स्थित दोनों गांव आज राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गये हैं. कुछ वर्ष पहले तक गांव के लोग रेजा-कुली का काम करते थे. जो गांव में रहते थे वन आधारित रोजगार करते थे. फलस्वरूप उनका जीवन गरीबी में बीतता था.
 
 
बाद में स्थानीय प्रशासन ने गांव की महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ना शुरू किया. महिलाएं जागरूक हुईं, तो उन्होंने योजनाओं का लाभ लेना शुरू किया और देखते ही देखते गांव की फिजा ही बदल गयी. आरा और केरम गांव में जल संरक्षण पर काम शुरू हुआ. कुछ ही दिनों में लोगों को इसकी अहमियत समझ में आ गयी और आज इन दोनों गांवों में गरीबों की संख्या नगण्य रह गयी है. रोजगार की तलाश में लोग गांव से बाहर नहीं जाते. सिर्फ जंगल पर आश्रित नहीं हैं.
 
आरा और केरम गांव में शुरू हुई जल संरक्षण योजनाओं की वजह से लोगों को साल भर पानी मिलता है. पहाड़ पर भी पानी को संरक्षित करने की व्यवस्था इस गांव के लोगों ने की है. फलस्वरूप वे साल भर खेती तो कर ही लेते हैं, पशुपालन और मत्स्यपालन भी करते हैं, जो उनकी कमाई को कई गुणा बढ़ा देता है. कृषि, पशुधन और सहकारिता मंत्रालय ने लोगों को मछली का जीरा (मत्स्य बीज) उपलब्ध कराया, ताकि वे मछलीपालन कर सकें.
यहां बताना प्रासंगिक होगा कि गांव में 45 डोभा का निर्माण किया गया था, जिसमें 30 से अधिक डोभा बरसात में पूरी तरह भर जाते हैं. इनमें साल भर मछली पालन होता है. हालांकि, 12 डोभा ऐसे हैं, जो पहाड़ों पर बने हैं. उनमें साल भर पानी नहीं रहता, लेकिन खेती के मौसम में जरूरत भर पानी जमा रहता है, जिससे लोग कृषि कार्य कर लेते हैं. ग्रामीण बताते हैं कि डोभा में मछली पालन करके लोग साल में कम से कम 10 से 15 हजार रुपये कमा लेते हैं.
इतना ही नहीं, गांव के लोग कृषि के साथ-साथ अपनी थाती जंगल को भी बचाने में पीछे नहीं हैं. गांव से सटे करीब 80 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगलों की रक्षा और सुरक्षा के लिए उन्होंने ‘जंगल बचाओ समिति’ का गठन किया है. सब मिलकर जंगल को सुरक्षित और संरक्षित कर रहे हैं. गांव की इन्हीं खूबियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रभावित किया है, जिसकी वजह से उन्होंने ‘मन की बात’ में इन गांवों का जिक्र किया.